साथ रहने की शायरी

साथ रहने की शायरी

साथ रहने की शायरी

साथ रहने की शायरी

तेरे साथ रहना है हर कदम

तू खुद को अकेला मत समझ

हमने तुझको अपना समझ लिया है…

मुकम्मल

तेरा साथ पाकर मुकम्मल हुआ हूँ मैं

अब ना मंजूर हमको जुदाई…

कोई भी आ जाये कठिनाई

तुझको तेरे से ही चुरा लूंगा मैं…

हाँथ में हाँथ

मेरे हाँथ में तेरा हाँथ दुआ में मांगता हूँ

उस रब को तुझसे पहले मानता हूँ…

अगर प्यार आजमाना हो हमारा

तो पाओगे हमारी आँखों में ख्वाब सिर्फ तुम्हारा…

इश्क़ की रहा

तन्हा नहीं छोड़ेंगे तुमको इश्क की राहों में

ज़नाब…

हमारी ख्वाहिश तो यह है मरना है सिर्फ तुम्हारी बाहों में…

हमारे रास्ते में कांटे क्यों ना हो पर फूल बिछाएंगे हम तुम्हारी राहों में

जुदा

जुदा हम खुद से हैं तुझ से नहीं हो पाएंगे

अगर दूर हुआ तू हम रो आएंगे

खुद को हम खो सकते हैं तुझको ना खो पाएंगे

अलग हम दुनिया से हो सकते हैं तुमसे नहीं हो पाएंगे…

कश्मकश

कशमकश में पड़ जाता है यह दिल मेरा

जब साथ होता है तेरा…

खामोशी तो दुनिया की भीड़ में रहने से होती है इस दिल में

तेरे रहने से दिल खुश रहता है मेरा…

तेरे अल्फ़ाज़

तुम्हारे अल्फाज ही इस दिल को भाते हैं

वरना दुनिया के अल्फाज़ मुझे कहा लुभाते है…

साथ रहना यूं ही सदा…

तेरे बिछड़ने के बाद हम कहा चेन से रह पाते है…

बिछड़ने

तेरे बिछड़ने के बाद कैसे रहेंगे हम

ज़नाब…

बस इस बात को सोच कर डर लगता है

वरना डरते तो हम खुद को खोने से भी नहीं है

शिकायत

शिकायत किया करो हमसे

जब दूर जाते है तुमसे…

मिलना और बिछड़ना तो तकदीर के हाँथ में है

जब तक हो साथ तो रोज मिला करो हमसे…

खुदाया

खुदा से शिकायत अब नहीं कर सकते हम

जिसको चाहा था उसके करीब है हम…

यूं मिला करते है अजनबी हसीन चहेरे

अब क्या करे इस दिल को पसंद आये नखरे तेरे…

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Shayari

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Rahul Kashyap

My name is Rahul Kashyap. And i am pursuing B.com Program. I am a website Designer too.

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